Sunday, September 7, 2008

bakar kya hai?

पिछली बार कई टिप्पणियां पढ़के लगा जैसे हमने एक सोच को जन्म तो दिया है पर वो सोच तब तक एक ज्वलंत विचारधारा का रूप नहीं ले सकती जब तक की हम ये साफ़ न कर दें की आख़िर बकर है क्या. तो इसी विषय में आज कुछ प्रकाश डालने की चेष्टा कर रहा हूँ.ज्यादातर लोग बकर को टाइम पास का एक साधन मात्र समझते हैं पर ये पूर्णतया सच नहीं है. हाँ बकर से टाइम पास होता है पर सिर्फ़ टाइम पास ही इसका उद्देश्य नहीं. बकर एक सोच है, एक विचारधारा जिसका जन्म तो न जाने कब ही हो गया था. आज तो हमने बस इसे एक ढांचा और नाम देने की कोशिश की है. बकर एक ऐसा शंख-रुपी सिद्धांत है जिसके जितना अन्दर जाते रहेंगे उतना ही रहस्य और पेचीदा पर सुखदायी होता रहेगा. अंग्रेज़ी में अगर कहें तो बकर एक 'स्कूल ऑफ़ थॉट' है. आपने कॉलेज के छात्रों को निहायत ही फालतू बातों पर बात करते देखा होगा जैसे 'क्लास के प्रोफ़ेसर का पाजामा', 'हम तुम और रम', 'पास वाली आंटी की भौहें' आदि. ये बकर है. ये बातें भले ही पहली नज़र में फालतू लगी हों पर ये सोचिये की ऐसे दुर्लभ विषयों पर चर्चा करना क्या हर किसी के बस की बात है? चर्चा तो छोडिये क्या ऐसे विषयों को सोच भी पाना हर आदमी के बस में है? बकर फालतू नहीं. बकर वो मंच है जहाँ दुनिया भर के लोग अपने आप से रु-ब-रु होते हैं. अपने अन्दर के उस कलाकार को पहचानते हैं जो दैनिक जीवन की उलझनों में शर्मा के बैठा है. बकर रोज़मरा के जीवन के उन नायकों की गाथा बयान करती है जो ना तो जीना छोड़ते हैं और ना ही जनता के बीच बैठ कर उपयुक्त मौका न मिल पाने का रोना रोते हैं. ध्यान रहे की बकर कोई विधि या तकनीक नहीं है. बकर एक बहाव है जो दो आदमियों के अंतर्मन को परस्पर लाने की क्षमता रखता है. आज बकर के प्रभाव में रहने से कितने ही लोग अपने जीवन को एक नई रौशनी में देख पा रहे हैं. वे लोग जो अपने 'बौस' से परेशान हैं, जिन्हें किसी वजह से रात में नींद नहीं आती, जो अपनी बीवी के सामने अपने शब्द नहीं रख पाते, जो कविता रचते हैं पर किसी को सुना नहीं पाते. फिर भी ये लोग जब शाम को जब टहलने निकलते हैं तो किसी नुक्कड़ या दूकान पे मिल जाते हैं. ध्यान से सुनियेगा तो आप जान पायेंगे की इनकी बातों के विषय कितने अछूते हैं, कितने मार्मिक और फिर भी कितने हास्य हैं. ये बकर है.

'बकर क्या है जानने के लिए,

बकर कर पाना बहुत ज़रूरी है

आज तक किसी ने की तो नहीं'

(गुलज़ार की एक त्रिवेणी से प्रेरित)

अब तक प्रयत्नरत

आभार